Monday, 9 January 2017



एक मित्र की प्रेरणा से........ दूर बैठकर क्या जमाने का कहर देखिएगा कभी आईए आप, तब हमारा शहर देखिएगा आंखों में लिहाज, वो रवायते, वो रिवाज जिंदादिली, वो अपनेपन भरी नजर देखिएगा कभी आईए आप, तब हमारा शहर देखिएगा यूं तो हर जमीं में कोई न कोई कमी हैं गिनाईए आप फिर हमारा असर देखिएगा हमने दिया है जवाब नई इबारत लिख के इस बार भी चलिए आप कुछ नया देखिएगा कभी आईए आप, तब हमारा शहर देखिएगा

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