Monday, 9 January 2017


वो.......... 
समाया दिल में है एक ख्वाब आशियां की तरह, अभी भी दिल में है वो मेरे बेवफां की तरह। मेरा गुनाह मुझे पता था ऐ मेरे दुनियावालों, वफां मिली भी मुझे तो इक बेवफां की तरह। अभी भी दिल में है वो मेरे बेवफां की तरह। यूं तो कहा था सभी ने कि है ये रोग बुरा, बच के निकलना इस से इक नादिरा की तरह। इश्क न करना कभी तुम किसी फरेबी नजर से, वो अब भी चाहता है मुझको बेवफां की तरह। यूं तो कहता है कि है वो भी मजबूर बड़ा, मैं मिला भी उसे बस इक इम्तिहां की तरह। वो चाहकर भी तो अब कदम बढ़ा नहीं सकता, औं वो अब भी चाहता है मुझे बेवफां की तरह। वफां मिली भी मुझे तो इक बेवफां की तरह।

No comments:

Post a Comment