कल रात अनायास ही राष्ट्रवादी दल से जुड़े मुझसे कुछ कम राष्ट्रवादी मित्र फोन पर मिल गए और फिर वहीं निरर्थक संवाद लगभग आधे घंटे तक। उनके तर्क पार्टीवादी ज्यादा थे और मेरे राष्ट्रवादी ज्यादा! संवाद के कुछ अंश....
आप विचारधारा से लंबे समय से जुड़े हैं कुछ फेसबुक पर पक्ष में लिखते क्यों नही?
मेरा उत्तर- मैं राष्ट्रवादी हूं, पार्टीवादी, प्रधानमंत्री वादी या सत्तावादी नहीं। जब लगेगा की राष्ट्रहित में यह जरूरी है मैं बोलूंगा परंतु जब आप भी मानते हैं कि अभी जो हो रहा है वह अनुचित तो नहीं परंतु राष्ट्र के हित में नहीं। क्योंकि राष्ट्र की आवश्यकता दूसरी है और उनकी पूर्ति के बगैर इस एक्शन का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। इससे कालाधन तो रूकेगा नहीं परंतु राष्ट्र कई मोर्चे पर बहुत पीछे चला जाएगा।
जबतक घोर असमानता रहेगी यह संभव ही नहीं कि आप किसी को भ्रष्टाचारी बनने से रोक सके...घूस हमारी मानसिक अवस्था बन चुका है जिसके लिए मानसिक परिवर्तन जरूरी है। आप डंडे के जोर से किसी को घूस लेने से नहीं रोक सकते।
एक ओर आप बिग प्लेयर्स के हजारो करोड़ एक मिनिट में माफ कर दे रहे हैं और एक गरीब किसान, एक कामगर, एक छोटे व्यापारी के 50 हजार के कृषि लोन के बदले 01 लाख वसूल रहे हैं...आप उसको बेइ्रमान बनने से कैसे रोक सकते?
एक सामान्य कर्मचारी जिसकी पगार 50 हजार है आप उससे 01 साल में लगभग 50 हजार आयकर और वैट, सेश तथा अन्य वस्तु कर के रूप में 50 हजार वसूल रहे है यानि कुल 01 लाख रूपये। आमदनी का लगभग 18 फीसदी वह कर चुका रहा है। इसके अलावा आवास व्यय, शिक्षा व्यय, स्वास्थ्य व्यय एवं भोजन व्यय के बाद उसके पास कोइ्र जमा-पूंजी नहीं बच पा रही। अगर उसके परिवार में किसी को कोई गंभीर रोग हो जाएं तो इलाज के लिए उसको अपनी पैत्रृक संपत्ति बेचनी पड़ती है। अगर बेटी है तो उसको अच्छे से ब्याहना होता है। और आप उससे इ्र्रमानदारी की अपेक्षा करते हो! क्यो बने इ्र्रमानदार वह? मेरे एक करीबी रिश्तेदार हैं पांच बेटी हो गई थी बेचारे को पुराने दौर में। खुद क्लास 2 के इ्र्रमानदार आफिसर थे पर उच्च शिक्षित बेटियों का ब्याह आफिसर क्या सरकारी चपरासी से भी नहीं कर सके। उनकी ईमानदारी का क्या प्रतिफल? ऐसे तमाम सवाल है। दूसरे को ज्ञान देना आसान है पर जब खुद पे बीतती है तब एहसास होता है। सरकारी अधिकारियों से लेकर पांचवी पास नेताओं के बच्चे तो अफसर से ब्याहे जा रहे है न। पर अगर कोई ईमान वाला अफसर है तो अपने बच्चे को कभी अफसर से ब्याह नहीं पाता। तो आम आदमी क्या ईमानदारी को लेकर चाटे।
आप विचारधारा से लंबे समय से जुड़े हैं कुछ फेसबुक पर पक्ष में लिखते क्यों नही?
मेरा उत्तर- मैं राष्ट्रवादी हूं, पार्टीवादी, प्रधानमंत्री वादी या सत्तावादी नहीं। जब लगेगा की राष्ट्रहित में यह जरूरी है मैं बोलूंगा परंतु जब आप भी मानते हैं कि अभी जो हो रहा है वह अनुचित तो नहीं परंतु राष्ट्र के हित में नहीं। क्योंकि राष्ट्र की आवश्यकता दूसरी है और उनकी पूर्ति के बगैर इस एक्शन का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। इससे कालाधन तो रूकेगा नहीं परंतु राष्ट्र कई मोर्चे पर बहुत पीछे चला जाएगा।
जबतक घोर असमानता रहेगी यह संभव ही नहीं कि आप किसी को भ्रष्टाचारी बनने से रोक सके...घूस हमारी मानसिक अवस्था बन चुका है जिसके लिए मानसिक परिवर्तन जरूरी है। आप डंडे के जोर से किसी को घूस लेने से नहीं रोक सकते।
एक ओर आप बिग प्लेयर्स के हजारो करोड़ एक मिनिट में माफ कर दे रहे हैं और एक गरीब किसान, एक कामगर, एक छोटे व्यापारी के 50 हजार के कृषि लोन के बदले 01 लाख वसूल रहे हैं...आप उसको बेइ्रमान बनने से कैसे रोक सकते?
एक सामान्य कर्मचारी जिसकी पगार 50 हजार है आप उससे 01 साल में लगभग 50 हजार आयकर और वैट, सेश तथा अन्य वस्तु कर के रूप में 50 हजार वसूल रहे है यानि कुल 01 लाख रूपये। आमदनी का लगभग 18 फीसदी वह कर चुका रहा है। इसके अलावा आवास व्यय, शिक्षा व्यय, स्वास्थ्य व्यय एवं भोजन व्यय के बाद उसके पास कोइ्र जमा-पूंजी नहीं बच पा रही। अगर उसके परिवार में किसी को कोई गंभीर रोग हो जाएं तो इलाज के लिए उसको अपनी पैत्रृक संपत्ति बेचनी पड़ती है। अगर बेटी है तो उसको अच्छे से ब्याहना होता है। और आप उससे इ्र्रमानदारी की अपेक्षा करते हो! क्यो बने इ्र्रमानदार वह? मेरे एक करीबी रिश्तेदार हैं पांच बेटी हो गई थी बेचारे को पुराने दौर में। खुद क्लास 2 के इ्र्रमानदार आफिसर थे पर उच्च शिक्षित बेटियों का ब्याह आफिसर क्या सरकारी चपरासी से भी नहीं कर सके। उनकी ईमानदारी का क्या प्रतिफल? ऐसे तमाम सवाल है। दूसरे को ज्ञान देना आसान है पर जब खुद पे बीतती है तब एहसास होता है। सरकारी अधिकारियों से लेकर पांचवी पास नेताओं के बच्चे तो अफसर से ब्याहे जा रहे है न। पर अगर कोई ईमान वाला अफसर है तो अपने बच्चे को कभी अफसर से ब्याह नहीं पाता। तो आम आदमी क्या ईमानदारी को लेकर चाटे।
No comments:
Post a Comment