मुद्दे की राजनीति से दूर होते हम
मुद्दों पर विरोध और समर्थन आज भारतीय राजनीति के लिए ईद के चांद की तरह हो गया है। समाज से लेकर सोषल मीडिया तक में अतार्किक तरीके से मोदी विरोध और भक्ति की हवा चल रही है। विष्व को धर्म से लेकर ज्ञान के विविध आयामों से परिचित कराने वाले भारत में इस तरह के अबौद्धिकता अपेक्षित नहीं थे परंतु.... नीरव मोदी के प्रकरण में प्रधानमंत्री को आरोपित करना उसी तरह से ज्ञानषून्यता का परिचायक है। यह संभव है कि निष्चित तौर पर नीरव मोदी को सत्ता से सहयोग मिला परंतु हर बात के लिए प्रधानमंत्री पर तोहमत लगाकर हम अपने महानतम् लोकतंत्र को दुनिया के सामने षर्मसार करते है। ऐसे अबौद्धिक प्रजातियों को या तो प्रधानमंत्री पद का अर्थ नहीं पता या फिर अपने राजनीतिक आकाओं के सामने वाहवाही बढ़ोरने की जुगत है। भारतीय राजनीति में सोषल मीडिया के माध्यम से इस ओछेपन को प्रारंभ करने का पूरा श्रेय माननीय अरविंद केजरीवाल को जाता है जिन्होंने अपने छिछले और टपोरी किस्म के आरोपों से एक जमाने में भूचाल ला दिया था और फिर भाजपा-कांग्रेस के सोषल मीडिया सेल ने काउंटर प्रोपेगांडा के तहत इस टपोरीपन का जवाब देना प्रारंभ कर दिया। 2010-11 का यह दौर राजनीतिक ओछेपन की षुरूआत का दौर था। और हालात यह है कि आज को अदना सा मूर्ख अपने सोषल मीडिया एकाउंट से प्रधानमंत्री और माननीय राष्ट्रपति तक पर ओछी टिप्पणी कर देता है या कर सकता है। सार्थक विमर्ष किसी लोकतंत्र की आत्मा होती है। ऐसे में वर्तमान परिदृष्य में देष की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को इस बारे में कारगर प्रयास करने चाहिए।
मुद्दों पर विरोध और समर्थन आज भारतीय राजनीति के लिए ईद के चांद की तरह हो गया है। समाज से लेकर सोषल मीडिया तक में अतार्किक तरीके से मोदी विरोध और भक्ति की हवा चल रही है। विष्व को धर्म से लेकर ज्ञान के विविध आयामों से परिचित कराने वाले भारत में इस तरह के अबौद्धिकता अपेक्षित नहीं थे परंतु.... नीरव मोदी के प्रकरण में प्रधानमंत्री को आरोपित करना उसी तरह से ज्ञानषून्यता का परिचायक है। यह संभव है कि निष्चित तौर पर नीरव मोदी को सत्ता से सहयोग मिला परंतु हर बात के लिए प्रधानमंत्री पर तोहमत लगाकर हम अपने महानतम् लोकतंत्र को दुनिया के सामने षर्मसार करते है। ऐसे अबौद्धिक प्रजातियों को या तो प्रधानमंत्री पद का अर्थ नहीं पता या फिर अपने राजनीतिक आकाओं के सामने वाहवाही बढ़ोरने की जुगत है। भारतीय राजनीति में सोषल मीडिया के माध्यम से इस ओछेपन को प्रारंभ करने का पूरा श्रेय माननीय अरविंद केजरीवाल को जाता है जिन्होंने अपने छिछले और टपोरी किस्म के आरोपों से एक जमाने में भूचाल ला दिया था और फिर भाजपा-कांग्रेस के सोषल मीडिया सेल ने काउंटर प्रोपेगांडा के तहत इस टपोरीपन का जवाब देना प्रारंभ कर दिया। 2010-11 का यह दौर राजनीतिक ओछेपन की षुरूआत का दौर था। और हालात यह है कि आज को अदना सा मूर्ख अपने सोषल मीडिया एकाउंट से प्रधानमंत्री और माननीय राष्ट्रपति तक पर ओछी टिप्पणी कर देता है या कर सकता है। सार्थक विमर्ष किसी लोकतंत्र की आत्मा होती है। ऐसे में वर्तमान परिदृष्य में देष की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को इस बारे में कारगर प्रयास करने चाहिए।
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